कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026: छत्तीसगढ़ में वैकल्पिक फसलों के लिए ₹15,000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन
परिचय
छत्तीसगढ़ भारत के महत्वपूर्ण चावल उत्पादक राज्यों में से एक है, जहाँ धान किसानों के लिए एक प्रमुख खरीफ फसल है। हालाँकि, धान पर अत्यधिक निर्भरता सिंचाई की आवश्यकताओं को बढ़ा सकती है, भूजल संसाधनों पर दबाव डाल सकती है और कृषि विविधीकरण को सीमित कर सकती है।
किसानों को धान से अधिक जल-कुशल और आर्थिक रूप से लाभकारी फसलों की ओर स्थानांतरित होने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु, छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 के तहत उन किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर ₹15,000 प्रति एकड़ कर दी है, जो धान के स्थान पर पात्र वैकल्पिक फसलों की खेती करते हैं।
यह निर्णय विशेष रूप से दलहन और तिलहन के साथ-साथ अन्य वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देता है। छत्तीसगढ़ कृषक उन्नति योजना का उद्देश्य भूजल और मृदा संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहित करते हुए कृषि आय में सुधार करना है।
चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषक उन्नति योजना 2026 के तहत प्रोत्साहन राशि को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति एकड़ कर दिया है, उन किसानों के लिए जो धान की जगह पात्र वैकल्पिक फसलों की खेती करते हैं।
यह बदलाव कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक है और इसका उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है।
मुख्य बिंदु
- यह योजना दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, कपास और अन्य पात्र फसलों को बढ़ावा देती है।
- इसका उद्देश्य फसल विविधीकरण, भूजल संरक्षण, बेहतर मृदा स्वास्थ्य और अधिक कृषि आय को बढ़ावा देना है।
- किसानों को AgriStack और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करना होगा।
- एक डिजिटल फसल सर्वेक्षण फसल और खेती किए गए क्षेत्रफल का सत्यापन करेगा।
- सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
- खरीफ 2026 के लिए पंजीकरण/संशोधन 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकता है।
- अधिसूचित दलहन और तिलहन को PM-AASHA के तहत MSP-आधारित खरीद भी प्राप्त होगी।
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ क्या है?
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह समझना महत्वपूर्ण है कि कृषोन्नति योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को मजबूत करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है।
हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्रालय के तहत विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) को दो व्यापक कार्यक्रमों में समेकित करने की मंजूरी दी:
- PM-RKVY: टिकाऊ कृषि पर केंद्रित।
- कृषोन्नति योजना (KY): खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता पर केंद्रित।
छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए कृषक उन्नति योजना की जानकारी समझते समय राज्य में लागू प्रोत्साहन और केंद्र की व्यापक कृषि योजनाओं के बीच अंतर को समझना आवश्यक है।
कृषक उन्नति योजना CG 2026 के उद्देश्य
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 के मुख्य उद्देश्य हैं:
- कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना।
- किसानों की आय और प्रतिफल में सुधार करना।
- टिकाऊ और वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देना।
- खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता को मजबूत करना।
- कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का समग्र रूप से विकास करना।
मुख्य तथ्य
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नोडल मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| प्रकार | व्यापक कार्यक्रम |
| लागू | 2016–17 से |
| फोकस | खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता |
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 के प्रमुख घटक
कृषोन्नति योजना के अंतर्गत महत्वपूर्ण योजनाएँ और मिशन शामिल हैं:
- बागवानी के एकीकृत विकास का मिशन (MIDH)
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)
- राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA)
- राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन (NMOOP)
- कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM)
- कृषि विस्तार पर उप-मिशन (SMAE)
- बीज एवं रोपण सामग्री पर उप-मिशन (SMSP)
- कृषि विपणन पर एकीकृत योजना (ISAM)
- कृषि में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP-A)
- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (MOVCDNER)
क्या बदला है?
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 के तहत घोषित प्रमुख बदलाव पात्र वैकल्पिक फसलों के लिए प्रोत्साहन सहायता में वृद्धि है।
| पहलू | पहले | नया प्रावधान |
|---|---|---|
| धान की जगह पात्र वैकल्पिक फसलों के लिए प्रोत्साहन | ₹10,000/एकड़ | ₹15,000/एकड़ |
| प्रमुख फोकस | फसल विविधीकरण | फसल विविधीकरण के लिए अधिक प्रोत्साहन |
| भुगतान का तरीका | योजना-आधारित सहायता | पात्र किसानों को DBT |
| सत्यापन | कृषि अभिलेख | डिजिटल फसल सर्वेक्षण + सत्यापित क्षेत्रफल |
₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति एकड़ किए जाने से उन किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक प्रोत्साहन मिलता है जो धान की खेती से हटने पर विचार कर रहे हैं। यही कृषक उन्नति योजना लाभ का प्रमुख हिस्सा है।
धान के बजाय वैकल्पिक फसलों को क्यों बढ़ावा दिया जाए?
छत्तीसगढ़ में धान एक महत्वपूर्ण फसल है, लेकिन इसकी खेती में पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य कृषि इनपुट की आवश्यकता हो सकती है।
इसलिए वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने से आर्थिक और पारिस्थितिक दोनों चिंताओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है।
- कम सिंचाई आवश्यकता
- कई दलहन और तिलहन फसलों की खेती में धान की तुलना में अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है।
- इससे सिंचाई संसाधनों पर निर्भरता कम हो सकती है।
- भूजल संरक्षण
- सिंचाई की कम मांग भूजल संरक्षण में योगदान कर सकती है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ कृषि जल उपयोग भूजल भंडार पर दबाव डालता है।
- कम उत्पादन लागत
- कम सिंचाई आवश्यकता वाली वैकल्पिक फसलें संभावित रूप से निम्नलिखित को कम कर सकती हैं:
- सिंचाई व्यय
- ऊर्जा लागत
- कुछ इनपुट लागत
- इससे कृषि लाभप्रदता में सुधार हो सकता है।
- मृदा स्वास्थ्य में सुधार
- फसल विविधीकरण से एक ही फसल की लगातार खेती कम हो सकती है और बेहतर मृदा प्रबंधन में योगदान मिल सकता है।
- दलहन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दलहनी फसलें जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मिट्टी में नाइट्रोजन संवर्धन में योगदान कर सकती हैं।
- कृषि आय में वृद्धि
- निम्नलिखित का संयोजन:
- सरकारी प्रोत्साहन + फसल विविधीकरण + कम संसाधन आवश्यकताएँ + बाजार समर्थन
- संभावित रूप से किसानों के आर्थिक प्रतिफल में सुधार कर सकता है।
- निम्नलिखित का संयोजन:
इस दृष्टि से कृषक उन्नति योजना लाभ केवल प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि कम संसाधन लागत और बेहतर बाजार समर्थन से भी जुड़ा है।
विविधीकरण के दृष्टिकोण के अंतर्गत शामिल फसलें
यह नीति विभिन्न वैकल्पिक खरीफ फसलों को बढ़ावा देती है।
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 में प्रमुख फसलें:
- मक्का
- कोदो
- कुटकी
- रागी
- दलहन
- तिलहन
- कपास
इनमें दलहन और तिलहन पर विशेष ध्यान दिया जाता है क्योंकि वे कृषि विविधीकरण और पानी पर कम निर्भरता, दोनों में योगदान कर सकते हैं।
दलहन और तिलहन: ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
दलहन और तिलहन को बढ़ावा देने का महत्व व्यक्तिगत कृषि आय से कहीं अधिक है।
दलहन
उदाहरणों में निम्नलिखित फसलें शामिल हैं:
- अरहर
- मूंग
- उड़द
- चना
दलहन प्रोटीन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं और पोषण सुरक्षा में योगदान कर सकते हैं।
वे जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मृदा उर्वरता में भी सहायता कर सकते हैं।
तिलहन
तिलहन फसलें खाद्य तेलों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
घरेलू उत्पादन में वृद्धि निम्नलिखित में योगदान कर सकती है:
- आयातित खाद्य तेलों पर निर्भरता कम करना।
- किसानों के लिए आय के अवसर बढ़ाना।
- कृषि उत्पादन में विविधता लाना।
इसलिए दलहन और तिलहन को प्रोत्साहित करने का राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर, दोनों पर महत्व हो सकता है।
डिजिटल पंजीकरण और सत्यापन
योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता डिजिटल कृषि अभिलेखों पर इसकी निर्भरता है।
अनिवार्य पंजीकरण
लाभ प्राप्त करने के इच्छुक किसानों को निम्नलिखित के माध्यम से पंजीकृत होना होगा:
- AgriStack
- एकीकृत किसान पोर्टल
कृषक उन्नति योजना पात्रता के लिए किसानों को निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण या आवश्यक संशोधन के लिए अपनी संबंधित सहकारी समिति में जाना आवश्यक है।
खरीफ 2026 की अंतिम तिथि
खरीफ 2026 सीजन के लिए:
- 31 अक्टूबर 2026 नए पंजीकरण और आवश्यक संशोधनों की अंतिम तिथि है।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण की भूमिका
वास्तविक खेती किए गए क्षेत्रफल और बोई गई फसल का सत्यापन डिजिटल फसल सर्वेक्षण के माध्यम से किया जाएगा।
यह निम्नलिखित स्थापित करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है:
किसान → भूमि क्षेत्रफल → उगाई गई फसल → पात्रता → वित्तीय सहायता
डिजिटल सत्यापन क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मदद कर सकता है:
- पारदर्शिता में सुधार करने में।
- वास्तविक फसल की खेती का सत्यापन करने में।
- लाभार्थी की पहचान में त्रुटियों को कम करने में।
- सहायता को सत्यापित भूमि और फसल की जानकारी से जोड़ने में।
- DBT-आधारित कृषि सहायता को मजबूत करने में।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण
सत्यापन के बाद पात्र किसानों को इनपुट सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होगी।
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 प्रक्रिया
पंजीकरण → फसल की बुवाई → डिजिटल फसल सर्वेक्षण → सत्यापन → पात्र क्षेत्रफल का निर्धारण → DBT भुगतान
सहायता की गणना सत्यापित/पात्र क्षेत्रफल के अनुसार की जाएगी।
इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है और लाभ वितरण में पारदर्शिता मजबूत होती है।
PM-AASHA और दलहन एवं तिलहन के लिए MSP समर्थन
कृषक उन्नति योजना CG 2026 के तहत प्रोत्साहन एक महत्वपूर्ण बाजार-समर्थन तंत्र के साथ जुड़ा हुआ है।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत अधिसूचित दलहन और तिलहन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी।
यह भी पढ़ें: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गेहूँ MSP को ₹2585 और राष्ट्रीय दलहन मिशन तक बढ़ाया
यह किसानों की कैसे मदद करता है?
पात्र अधिसूचित फसलों की खेती करने वाले किसान अपना उत्पादन निर्धारित खरीद केंद्रों पर बेच सकते हैं।
लागू पात्रता और खरीद प्रावधानों के अधीन, बिक्री की राशि DBT के माध्यम से किसान के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाएगी।
संयुक्त सहायता तंत्र
इसलिए नीति दो महत्वपूर्ण प्रकार की सहायता प्रदान करती है:
उत्पादन-पक्ष सहायता:
पात्र वैकल्पिक खेती के लिए ₹15,000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन।बाजार-पक्ष सहायता:
PM-AASHA के तहत अधिसूचित दलहन और तिलहन की MSP-आधारित खरीद।
यह संयोजन फसल विविधीकरण से जुड़े कुछ वित्तीय जोखिमों को कम कर सकता है।
नीति का महत्व
- कृषि विविधीकरण
- यह नीति किसानों को एक ही फसल पर अत्यधिक निर्भरता से हटकर अधिक विविध कृषि प्रणाली की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- जल संरक्षण
- कम पानी की मांग वाली फसलें भूजल और सिंचाई संसाधनों पर कृषि दबाव को कम कर सकती हैं।
- मृदा संरक्षण
- फसल विविधीकरण, विशेष रूप से दलहन को शामिल करना, बेहतर मृदा प्रबंधन में योगदान कर सकता है।
- किसान आय
- प्रत्यक्ष प्रोत्साहन पात्र वैकल्पिक फसलों की ओर स्थानांतरित होने वाले किसानों को अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्रदान करता है।
- पोषण सुरक्षा
- दलहन का अधिक उत्पादन प्रोटीन युक्त भोजन की उपलब्धता में योगदान कर सकता है।
- तिलहन उत्पादन
- तिलहन को प्रोत्साहित करना भारत के घरेलू खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य में योगदान कर सकता है।
- जलवायु-लचीली कृषि
- फसल विविधीकरण कृषि प्रणालियों को बदलते वर्षा पैटर्न, पानी की उपलब्धता और जलवायु से संबंधित अन्य जोखिमों के प्रति अधिक लचीला बना सकता है।
आर्थिक और पर्यावरणीय संबंध
यह नीति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसान कल्याण को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ जोड़ने का प्रयास करती है।
आर्थिक आयाम
- वित्तीय प्रोत्साहन
- कम इनपुट लागत
- वैकल्पिक आय के अवसर
- MSP-आधारित बाजार समर्थन
पर्यावरणीय आयाम
- भूजल संरक्षण
- सिंचाई की कम मांग
- बेहतर मृदा प्रबंधन
- फसल विविधीकरण
इस प्रकार, नीति को निम्नलिखित के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है:
“आय सहायता + कृषि विविधीकरण + संसाधन संरक्षण।”
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फसल विविधीकरण में चुनौतियाँ
बढ़े हुए प्रोत्साहन के बावजूद, किसानों को धान से वैकल्पिक फसलों की ओर स्थानांतरित करना आसान नहीं हो सकता है।
- बाजार जोखिम
- धान के लिए एक स्थापित खरीद और विपणन व्यवस्था है। किसानों को वैकल्पिक फसलों के संबंध में अधिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
- मूल्य में उतार-चढ़ाव
- उत्पादन और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर दलहन और तिलहन की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
- खरीद अवसंरचना
- MSP समर्थन को प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त खरीद केंद्र और समय पर खरीद आवश्यक हैं।
- किसान जागरूकता
- किसानों को निम्नलिखित के बारे में जानकारी की आवश्यकता है:
- उपयुक्त फसलें
- खेती की पद्धतियाँ
- अपेक्षित प्रतिफल
- बाजार की उपलब्धता
- सरकारी सहायता
- किसानों को निम्नलिखित के बारे में जानकारी की आवश्यकता है:
- बीज और इनपुट की उपलब्धता
- गुणवत्तापूर्ण बीज और उपयुक्त कृषि इनपुट सही समय पर उपलब्ध होने चाहिए।
- स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ
- हर वैकल्पिक फसल हर क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं होती। फसल चयन में निम्नलिखित पर विचार किया जाना चाहिए:
- मिट्टी का प्रकार
- वर्षा
- सिंचाई की उपलब्धता
- तापमान
- स्थानीय बाजार की मांग
- हर वैकल्पिक फसल हर क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं होती। फसल चयन में निम्नलिखित पर विचार किया जाना चाहिए:
कृषोन्नति योजना छत्तीसगढ़
कृषक उन्नति योजना CG 2026 के संदर्भ में यह नीति अत्यंत प्रासंगिक है क्योंकि कृषि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है।
प्रासंगिकता के प्रमुख क्षेत्र
- कृषि अर्थव्यवस्था:
फसल विविधीकरण अतिरिक्त आय के अवसर पैदा कर सकता है। - जल सुरक्षा:
अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों पर निर्भरता कम करने से भूजल संरक्षण में योगदान मिल सकता है। - मृदा स्वास्थ्य:
अधिक फसल विविधता टिकाऊ मृदा प्रबंधन में सहायता कर सकती है। - मोटे अनाज:
कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों को बढ़ावा देना छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कृषि पद्धतियों और पोषण सुरक्षा के लिए भी प्रासंगिक है। - किसान कल्याण:
₹15,000 प्रति एकड़ का प्रोत्साहन पात्र किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करता है। - डिजिटल कृषि:
AgriStack, एकीकृत किसान पोर्टल और डिजिटल फसल सर्वेक्षण कृषि प्रशासन में प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग को दर्शाते हैं।
इस प्रकार कृषक उन्नति योजना की जानकारी किसानों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
- सुनिश्चित बाजारों को मजबूत करना
- वैकल्पिक फसलों के लिए विश्वसनीय खरीद और विपणन तंत्र की आवश्यकता है ताकि किसानों को अत्यधिक मूल्य जोखिम का सामना न करना पड़े।
- MSP खरीद में सुधार
- अधिसूचित दलहन और तिलहन के लिए खरीद केंद्र सुलभ, समयबद्ध और पारदर्शी होने चाहिए।
- फसल-विशिष्ट तकनीकी सहायता प्रदान करना
- किसानों को बीज चयन, बुवाई, सिंचाई, कीट प्रबंधन और कटाई के संबंध में क्षेत्र-विशिष्ट सलाह मिलनी चाहिए।
- मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना
- दलहन, तिलहन और मोटे अनाज के लिए प्रसंस्करण इकाइयाँ किसानों द्वारा प्राप्त मूल्य को बढ़ा सकती हैं।
- किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करना
- FPOs किसानों को निम्नलिखित में सहायता कर सकते हैं:
- सामूहिक खरीद
- भंडारण
- प्रसंस्करण
- विपणन
- बेहतर सौदेबाजी शक्ति
- FPOs किसानों को निम्नलिखित में सहायता कर सकते हैं:
- भंडारण अवसंरचना में सुधार
- पर्याप्त गोदाम और वैज्ञानिक भंडारण फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान और मजबूरी में बिक्री को कम कर सकते हैं।
- फसल योजना के लिए डेटा का उपयोग
- डिजिटल कृषि डेटाबेस और फसल सर्वेक्षणों का उपयोग बेहतर जिला-स्तरीय फसल विविधीकरण रणनीतियाँ विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
निष्कर्ष
कृषक उन्नति योजना CG 2026 के तहत छत्तीसगढ़ कृषक उन्नति योजना के प्रोत्साहन को ₹15,000 प्रति एकड़ तक बढ़ाने का उद्देश्य दलहन, तिलहन, मक्का, मोटे अनाज और कपास को प्रोत्साहित करके CG में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है।
यह पहल जल उपयोग, मृदा स्वास्थ्य और कृषि आय से संबंधित मुद्दों को संबोधित करती है, जिसमें MSP-आधारित खरीद, डिजिटल पंजीकरण, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और DBT कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करते हैं।
दीर्घकालिक सफलता के लिए प्रोत्साहनों को सुनिश्चित बाजारों, खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण और किसान जागरूकता का समर्थन मिलना आवश्यक है। कुल मिलाकर, कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ 2026 किसान कल्याण, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देती है।
CGPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q1. कृषक उन्नति योजना CG 2026 के तहत धान की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले पात्र किसानों के लिए कितना प्रोत्साहन घोषित किया गया है?
₹5,000 प्रति एकड़
B. ₹10,000 प्रति एकड़
C. ₹15,000 प्रति एकड़
D. ₹20,000 प्रति एकड़
उत्तर: C. ₹15,000 प्रति एकड़
Q2. कृषक उन्नति योजना CG 2026 के तहत प्रोत्साहन बढ़ाने का प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?
केवल गेहूँ की खेती को बढ़ावा देना
B. धान से हटकर फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना
C. सभी खरीफ फसलों को समाप्त करना
D. केवल बागवानी फसलों को बढ़ावा देना
उत्तर: B. धान से हटकर फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना
Q3. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- AgriStack के माध्यम से पंजीकरण योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
- डिजिटल फसल सर्वेक्षण का उपयोग खेती किए गए क्षेत्रफल और फसल के सत्यापन के लिए किया जाएगा।
- पात्र सहायता DBT के माध्यम से स्थानांतरित की जाएगी।
- खरीफ 2026 के लिए पंजीकरण और संशोधन 31 अक्टूबर 2026 तक किए जा सकते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
1 और 2 केवल
B. 1, 2 और 3 केवल
C. 2, 3 और 4 केवल
D. 1, 2, 3 और 4
उत्तर: D. 1, 2, 3 और 4
CGPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न
प्रश्न 1
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ के तहत वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना किसान आय और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का एक प्रयास है। चर्चा कीजिए।
प्रश्न 2
छत्तीसगढ़ में टिकाऊ कृषि के लिए फसल विविधीकरण के महत्व को समझाइए। किसानों को धान से वैकल्पिक फसलों की ओर स्थानांतरित करने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
प्रश्न 3
वित्तीय प्रोत्साहन, MSP खरीद और डिजिटल कृषि प्रणालियों का संयोजन छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण को कैसे मजबूत कर सकता है?
त्वरित पुनरावृत्ति
| विषय | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| योजना | कृषक उन्नति योजना |
| राज्य | छत्तीसगढ़ |
| नया प्रोत्साहन | ₹15,000/एकड़ |
| पहले का प्रोत्साहन | ₹10,000/एकड़ |
| मुख्य उद्देश्य | धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना |
| प्रमुख फसलें | मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहन, तिलहन, कपास |
| प्रमुख फोकस | फसल विविधीकरण |
| पर्यावरणीय लाभ | भूजल एवं मृदा संरक्षण |
| पंजीकरण | AgriStack + एकीकृत किसान पोर्टल |
| सत्यापन | डिजिटल फसल सर्वेक्षण |
| भुगतान | DBT |
| खरीफ 2026 की अंतिम तिथि | 31 अक्टूबर 2026 |
| बाजार समर्थन | PM-AASHA |
| MSP खरीद | अधिसूचित दलहन एवं तिलहन |
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