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छत्तीसगढ़ जल संरक्षण में देश में प्रथम, जल संचय अभियान में भी अव्वल

Chhattisgarh tops in rainwater conservation

परिचय

छत्तीसगढ़ वर्षा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है और केंद्र के जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि राज्य द्वारा जनभागीदारी, जल संचयन से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं और भूजल प्रबंधन पर दिए जा रहे जोर को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ के जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल का प्रस्तुतीकरण किया।

खबरों में क्यों?

छत्तीसगढ़ ने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के प्रयासों के लिए जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में प्रथम स्थान हासिल किया है।

प्रमुख बिंदु

  • छत्तीसगढ़ ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में प्रथम स्थान हासिल किया।
  • राज्य ने पहले दो चरणों में दूसरा स्थान हासिल किया था।
  • तीसरे चरण के तहत राज्य में 79,775 जल संरक्षण संरचनाएं दर्ज की गईं।
  • इनमें से 77,719 संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है।
  • सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदा बाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ का सामुदायिक आधारित जल संरक्षण मॉडल

छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे जनआंदोलन में बदलने का प्रयास किया है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव में शामिल किया गया है।

प्रमुख तत्व

  • जल संरक्षण में जनभागीदारी।
  • वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण।
  • संरचनाओं की जियो-टैगिंग और मैपिंग।
  • पूर्ण किए गए कार्यों की नियमित निगरानी।
  • किसानों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
  • जल भंडारण और भूजल पुनर्भरण दोनों पर ध्यान।
  • सरकारी प्रयासों को सामुदायिक पहलों के साथ जोड़ना।

यह भी पढ़ें: महासमुंद जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 में देश में प्रथम

जल संचय जन भागीदारी अभियान

जल संचय जन भागीदारी पहल को वर्ष 2024 में सामूहिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

इस पहल का उद्देश्य सरकारी संस्थानों, समुदायों और अन्य हितधारकों के सहयोग से वर्षा जल की हर संभव बूंद का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

मुख्य उद्देश्य

  • वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
  • भूजल पुनर्भरण में वृद्धि करना।
  • जल निकायों और बोरवेल के पुनर्भरण को प्रोत्साहित करना।
  • रिचार्ज शाफ्ट और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं का विकास करना।
  • जल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • सरकार और समाज के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • स्थानीय जल सुरक्षा में सुधार करना।
  • सूखे और जलवायु संबंधी जल चुनौतियों के प्रति लचीलापन बढ़ाना।

जल संचय जन भागीदारी: प्रमुख विशेषताएं

विशेषताविवरण
शुरुआत2024
प्रमुख फोकसवर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण
दृष्टिकोणसरकार + सामुदायिक भागीदारी
प्रमुख संरचनाएंरिचार्ज संरचनाएं, रिचार्ज शाफ्ट और जल संचयन प्रणालियां
मुख्य उद्देश्यवर्षा जल की हर संभव बूंद का संरक्षण
हितधारकसरकार, समुदाय, किसान, NGOs और अन्य संस्थान
अपेक्षित परिणामबेहतर जल सुरक्षा और भूजल पुनर्भरण

अभियान में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ ने जल संचय जन भागीदारी अभियान में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।

अभियान का चरणछत्तीसगढ़ की स्थिति
चरण Iदूसरा
चरण IIदूसरा
चरण IIIपहला

रैंकिंग में सुधार राज्य द्वारा जनभागीदारी और जल संरक्षण से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण संरचनाएं

अभियान के तीसरे चरण के तहत राज्यभर में बड़ी संख्या में जल संरक्षण संरचनाएं दर्ज की गई हैं।

संकेतकसंख्या
कुल दर्ज संरचनाएं79,775
पूर्ण संरचनाएं77,719
अभी पूरी होनी बाकी2,056

महत्वपूर्ण आंकड़े

  • कुल दर्ज संरचनाएं: 79,775
  • पूर्ण संरचनाएं: 77,719
  • फोकस: वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण
  • निगरानी: जियो-टैगिंग, मैपिंग और नियमित निगरानी

इन संरचनाओं का उद्देश्य जल की उपलब्धता बढ़ाना, भूजल पुनर्भरण में सुधार करना और सीमित जल संसाधनों पर निर्भरता कम करना है।

जल की कमी वाले ब्लॉकों में कमी

राज्य द्वारा बताए गए महत्वपूर्ण परिणामों में से एक जल की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या में कमी है।

संकेतकपहलेवर्तमान
जल की कमी वाले ब्लॉक2619
कमी 7 ब्लॉक

प्रमुख तथ्य

  • पहले जल की कमी वाले ब्लॉक: 26
  • वर्तमान संख्या: 19
  • कमी: 7 ब्लॉक
  • पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

यह राज्य की भूजल और जल संसाधन स्थिति में सुधार का संकेत देता है, हालांकि निरंतर निगरानी और संरक्षण प्रयास आवश्यक हैं।

भारत के शीर्ष 10 जिलों में छत्तीसगढ़ के जिले

जल संरक्षण में प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ के पांच जिलों को देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल किया गया है।

जिले

  • सूरजपुर
  • महासमुंद
  • बालोद
  • बलौदा बाजार-भाटापारा
  • कबीरधाम

कोरिया का ‘5% मॉडल’

कोरिया जिले का 5% मॉडल छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।

इस मॉडल के तहत किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का लगभग 5% हिस्सा वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से संबंधित संरचनाओं के लिए उपलब्ध कराते हैं।

मॉडल कैसे काम करता है?

कृषि भूमि

लगभग 5% क्षेत्र स्वेच्छा से उपलब्ध

वर्षा जल संचयन/पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण

खेत में वर्षा जल का संरक्षण

सतही बहाव में कमी

भूजल पुनर्भरण में सुधार

कोरिया 5% मॉडल: त्वरित तथ्य

विशेषताविवरण
जिलाकोरिया, छत्तीसगढ़
योगदानकृषि भूमि का लगभग 5%
प्रकृतिस्वैच्छिक भागीदारी
मुख्य उद्देश्यवर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण
प्रमुख लाभसतही बहाव में कमी
अपेक्षित परिणामबेहतर भूजल पुनर्भरण

महत्व

  • किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
  • सतही बहाव के माध्यम से वर्षा जल की हानि को कम करता है।
  • कृषि क्षेत्रों में जल को बनाए रखने में मदद करता है।
  • भूजल पुनर्भरण में सहायता करता है।
  • समुदाय आधारित जल प्रबंधन की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
  • अन्य क्षेत्रों के लिए अपनाए जा सकने वाले मॉडल के रूप में उदाहरण प्रस्तुत करता है।

यह भी पढ़ें: जल जीवन मिशन में धमतरी प्रथम स्थान पर

सामुदायिक भागीदारी की भूमिका

छत्तीसगढ़ के मॉडल की केंद्रीय विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पूरी तरह सरकारी एजेंसियों पर निर्भर रहने के बजाय, यह दृष्टिकोण जमीनी स्तर पर हितधारकों को जल संरक्षण में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।

प्रमुख हितधारक

  • किसान
  • ग्राम पंचायतें
  • जल सखियां
  • जल मित्र
  • स्थानीय समुदाय
  • सरकारी विभाग
  • स्थानीय प्रशासनिक निकाय

यह दृष्टिकोण इस सिद्धांत को दर्शाता है कि जल संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।

जल संचय जन भागीदारी के लाभ

यह अभियान कई पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक लाभ उत्पन्न करने का प्रयास करता है।

  • भूजल पुनर्भरण
    • वर्षा जल और सतही बहाव को एकत्रित कर भूजल पुनर्भरण संरचनाओं की ओर निर्देशित किया जा सकता है।
  • जल सुरक्षा
    • बेहतर जल भंडारण और पुनर्भरण से शुष्क अवधि के दौरान पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
  • जलवायु लचीलापन
    • जल संरक्षण संरचनाएं समुदायों को भारी वर्षा और जल की कमी दोनों से निपटने में मदद कर सकती हैं।
  • सतही बहाव में कमी
    • वर्षा जल को संरक्षित करने से सतही बहाव के रूप में बह जाने वाले पानी की मात्रा कम हो सकती है।
  • सामुदायिक स्वामित्व
    • जनभागीदारी स्थानीय जल संसाधनों के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़ा सकती है।
  • कृषि लाभ
    • भूजल की बेहतर उपलब्धता कृषि गतिविधियों को समर्थन दे सकती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो भूजल पर निर्भर हैं।

जियो-टैगिंग और निगरानी

जल संरक्षण संरचनाओं की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।

प्रमुख उपाय

  • संरचनाओं की जियो-टैगिंग।
  • डिजिटल मैपिंग।
  • नियमित निगरानी।
  • पूर्ण किए गए कार्यों की ट्रैकिंग।
  • जल संरक्षण परिसंपत्तियों की बेहतर पहचान।

ऐसे उपाय पारदर्शिता में सुधार कर सकते हैं और अधिकारियों को जल संरक्षण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का मूल्यांकन करने में मदद कर सकते हैं।

जल संचय जन भागीदारी: प्रमुख विशेषताएं

विशेषतामहत्व
शुरुआत2024
प्रमुख फोकसवर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण
दृष्टिकोणसरकार + सामुदायिक भागीदारी
प्रमुख संरचनाएंरिचार्ज संरचनाएं, रिचार्ज शाफ्ट और जल संचयन प्रणालियां
मुख्य उद्देश्यवर्षा जल की हर संभव बूंद का संरक्षण
हितधारकसरकार, समुदाय, किसान, NGOs और अन्य संस्थान
अपेक्षित परिणामबेहतर जल सुरक्षा और भूजल पुनर्भरण

‘कैच द रेन’ अभियान

जल संचय जन भागीदारी का दृष्टिकोण भारत में वर्षा जल संरक्षण के व्यापक प्रयासों से जुड़ा है, जिसमें कैच द रेन अभियान भी शामिल है।

इसका मूल विचार यह है कि जहां भी वर्षा हो, वहां वर्षा जल को एकत्रित और संरक्षित किया जाए तथा जल भंडारण और भूजल पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानीय तरीकों का उपयोग किया जाए।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • वर्षा जल संचयन।
  • पारंपरिक जल निकायों का पुनरुद्धार।
  • भूजल पुनर्भरण।
  • रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण।
  • सामुदायिक जागरूकता।
  • स्थानीय जल संसाधन प्रबंधन।

शैलो एक्विफर मैनेजमेंट कार्यक्रम

भूजल प्रबंधन के क्षेत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण पहल शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) कार्यक्रम है, जिसे आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) के सहयोग से लागू किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम वैज्ञानिक योजना, तकनीकी सहायता और उपयुक्त पुनर्भरण उपायों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण में सुधार पर केंद्रित है।

SAM कार्यक्रम: प्रमुख तथ्य

पैरामीटरविवरण
पूरा नामशैलो एक्विफर मैनेजमेंट
मंत्रालयआवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
तकनीकी भागीदारराष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान
कवरेज75 AMRUT शहर
प्रमुख फोकसशहरी भूजल पुनर्भरण
दृष्टिकोणवैज्ञानिक और तकनीकी भूजल प्रबंधन
संबंधित अभियानकैच द रेन

SAM क्यों महत्वपूर्ण है?

तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बदलते वर्षा पैटर्न ने शहरी जल संसाधनों पर दबाव बढ़ाया है। भूजल स्तर में गिरावट, शहरी बाढ़ और अपर्याप्त वर्षा जल पुनर्भरण कई शहरों के लिए उभरती चुनौतियां हैं।

SAM कार्यक्रम वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है।

प्रमुख उद्देश्य

  • शहरी क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण में सुधार करना।
  • उथले जलभृतों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देना।
  • टिकाऊ वर्षा जल संचयन को समर्थन देना।
  • शहरी जल सुरक्षा में सुधार करना।
  • सतही बहाव को कम करना।
  • शहरी बाढ़ को कम करने में मदद करना।
  • जलवायु लचीलापन मजबूत करना।

75 AMRUT शहर और SAM कार्यक्रम

SAM कार्यक्रम में 75 AMRUT शहरों की भागीदारी के साथ इसे लागू किया जा रहा है।

ये शहर अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग भूजल पुनर्भरण तकनीकों पर काम कर रहे हैं।

पुनर्भरण तकनीकें

  • रिचार्ज शाफ्ट।
  • इंजेक्शन वेल।
  • चेक डैम।
  • गैबियन वॉल।
  • सर्कुलर संरचनाएं।
  • मॉड्यूलर रिचार्ज पिट।

इन उपायों का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ-साथ भूजल पुनर्भरण को बढ़ाना है।

AMRUT और शहरी जल प्रबंधन

अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT) को शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार के उद्देश्य से जून 2015 में शुरू किया गया था।

AMRUT: त्वरित तथ्य

पैरामीटरविवरण
पूरा नामअटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन
शुरुआतजून 2015
प्रमुख फोकसशहरी बुनियादी ढांचा
जल संबंधी क्षेत्रजल आपूर्ति, सीवरेज और तूफानी जल निकासी
अन्य फोकसहरित क्षेत्र और शहरी बुनियादी ढांचा

AMRUT के प्रमुख क्षेत्र

  • जल आपूर्ति।
  • सीवरेज।
  • तूफानी जल निकासी।
  • हरित क्षेत्रों का विकास।
  • शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार।

SAM कार्यक्रम वैज्ञानिक पुनर्भरण विधियों को बढ़ावा देकर शहरी जल सुरक्षा में भूजल प्रबंधन का एक अतिरिक्त आयाम जोड़ता है।

शहरी भूजल पुनर्भरण पर राष्ट्रीय संवाद

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान के सहयोग से 75 AMRUT शहरों को शामिल करते हुए एक राष्ट्रीय संवाद आयोजित किया।

इस मंच ने शहरों को निम्नलिखित अवसर प्रदान किए:

  • अपनी प्रगति प्रस्तुत करना।
  • सफल प्रथाओं को साझा करना।
  • चुनौतियों पर चर्चा करना।
  • भूजल पुनर्भरण पहलों को प्रदर्शित करना।
  • शहरी जल सुरक्षा को मजबूत करने के तरीकों का पता लगाना।

शहरी भूजल प्रबंधन का महत्व

जनसंख्या वृद्धि, निर्माण गतिविधियों और बदलते वर्षा पैटर्न के कारण शहरी क्षेत्रों में जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।

प्रमुख चुनौतियां

  • भूजल स्तर में गिरावट।
  • पानी की बढ़ती मांग।
  • प्राकृतिक भूजल पुनर्भरण में कमी।
  • शहरी बाढ़।
  • बदलते वर्षा पैटर्न।
  • जलवायु संबंधी बढ़ते जोखिम।

वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन और वर्षा जल संचयन शहरों को इन चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकते हैं।

ग्रामीण और शहरी जल संरक्षण: तुलनात्मक दृष्टिकोण

जल संरक्षण का दृष्टिकोण ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी और शहरी क्षेत्रों में वैज्ञानिक एवं तकनीकी हस्तक्षेपों को जोड़ता है।

ग्रामीण दृष्टिकोणशहरी दृष्टिकोण
किसानों की भागीदारीवैज्ञानिक भूजल योजना
ग्राम पंचायतेंशहरी स्थानीय निकाय
जल सखियां और जल मित्रतकनीकी एजेंसियां
खेत आधारित पुनर्भरणरिचार्ज शाफ्ट
सामुदायिक जल संरचनाएंइंजेक्शन वेल
कोरिया 5% मॉडलमॉड्यूलर रिचार्ज पिट
स्थानीय जल प्रबंधनशैलो एक्विफर मैनेजमेंट

पर्यावरणीय और विकासात्मक महत्व

जल संरक्षण केवल जल की उपलब्धता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह कृषि स्थिरता, ग्रामीण विकास, जलवायु लचीलापन और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है।

व्यापक महत्व

  • भूजल की उपलब्धता में सुधार।
  • कृषि को समर्थन।
  • सूखे के प्रति संवेदनशीलता में कमी।
  • अत्यधिक वर्षा के प्रबंधन में सहायता।
  • सतत विकास को समर्थन।
  • स्थानीय भागीदारी को मजबूत करना।
  • दीर्घकालिक जल सुरक्षा में सुधार।
  • मौजूदा जल स्रोतों पर दबाव कम करना।

चुनौतियां

महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, जल संरक्षण कार्यक्रमों के लिए निरंतर क्रियान्वयन और निगरानी आवश्यक है।

प्रमुख चुनौतियां

  • जल संरक्षण संरचनाओं का दीर्घकालिक रखरखाव।
  • प्रभावी सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • भूजल स्तर की निगरानी।
  • भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकना।
  • स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार संरक्षण उपाय अपनाना।
  • पुनर्भरण संरचनाओं की वैज्ञानिक योजना सुनिश्चित करना।
  • जल गुणवत्ता बनाए रखना।
  • विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय हितधारकों के बीच समन्वय।

आगे की राह

  • सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना
    • स्थानीय समुदायों को जल संरक्षण संरचनाओं की योजना, क्रियान्वयन और रखरखाव में केंद्रीय भूमिका में रखा जाना चाहिए।
  • वैज्ञानिक जल प्रबंधन को बढ़ावा देना
    • पारंपरिक संरक्षण प्रथाओं को भूजल डेटा, मैपिंग और वैज्ञानिक आकलन के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
  • सफल मॉडलों का विस्तार
    • कोरिया 5% मॉडल जैसी सफल पहलों का अध्ययन कर उपयुक्त स्थानीय परिस्थितियों वाले अन्य जिलों में इन्हें अपनाया जा सकता है।
  • निगरानी में सुधार
    • नियमित जियो-टैगिंग, मैपिंग और भूजल स्तर की निगरानी से संरक्षण परियोजनाओं के वास्तविक प्रभाव को मापने में मदद मिल सकती है।
  • रखरखाव पर ध्यान
    • जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण केवल पहला कदम है। उनकी नियमित देखभाल दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए आवश्यक है।
  • ग्रामीण और शहरी दृष्टिकोणों का एकीकरण
    • जल सुरक्षा के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई आवश्यक है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी के साथ वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन को जोड़ा जाए।

CGPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

Q1. जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने कौन-सा स्थान प्राप्त किया?

A. प्रथम
B. द्वितीय
C. तृतीय
D. चतुर्थ

उत्तर: A. प्रथम

Q2. जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ द्वारा बताए गए ‘5% मॉडल’ का संबंध किस जिले से है?

A. कोरिया
B. बस्तर
C. धमतरी
D. रायगढ़

उत्तर: A. कोरिया

Q3. कोरिया 5% मॉडल के तहत किसान मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए योगदान करते हैं?

A. वनीकरण
B. वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण
C. सौर ऊर्जा उत्पादन
D. ग्रामीण सड़क निर्माण

उत्तर: B. वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण

Q4. छत्तीसगढ़ में जल की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या कितनी हुई है?

A. 30 से 20
B. 26 से 19
C. 25 से 15
D. 22 से 12

उत्तर: B. 26 से 19

Q5. शैलो एक्विफर मैनेजमेंट कार्यक्रम मुख्य रूप से किससे संबंधित है?

A. वन प्रबंधन
B. शहरी भूजल पुनर्भरण
C. तटीय प्रबंधन
D. कृषि विपणन

उत्तर: B. शहरी भूजल पुनर्भरण

Q6. शैलो एक्विफर मैनेजमेंट कार्यक्रम में कितने AMRUT शहर भाग ले रहे हैं?

A. 50
B. 60
C. 75
D. 100

उत्तर: C. 75

Q7. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. जल संचय जन भागीदारी के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

  2. कोरिया 5% मॉडल भूजल पुनर्भरण में किसानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।

  3. SAM कार्यक्रम शहरी क्षेत्रों में भूजल प्रबंधन पर केंद्रित है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A. केवल 1
B. केवल 1 और 2
C. केवल 2 और 3
D. 1, 2 और 3

उत्तर: D. 1, 2 और 3

CGPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न

प्रश्न 1

छत्तीसगढ़ के सामुदायिक आधारित जल संरक्षण मॉडल का भूजल सुरक्षा और जलवायु लचीलापन बढ़ाने में महत्व स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 2

छत्तीसगढ़ के कोरिया 5% मॉडल की व्याख्या कीजिए। सामुदायिक भागीदारी सतत जल संसाधन प्रबंधन में किस प्रकार योगदान दे सकती है?

प्रश्न 3

जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन पर्यावरणीय शासन में जनभागीदारी के महत्व को दर्शाता है। चर्चा कीजिए।

प्रश्न 4

शैलो एक्विफर मैनेजमेंट कार्यक्रम क्या है? शहरी जल सुरक्षा और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने में इसकी भूमिका पर चर्चा कीजिए।

अंतिम समय की त्वरित पुनरावृत्ति

  • जल संचय जन भागीदारी → 2024 में शुरू।
  • छत्तीसगढ़ → तीसरे चरण में प्रथम।
  • चरण I और II → दूसरा स्थान।
  • दर्ज संरचनाएं → 79,775।
  • पूर्ण संरचनाएं → 77,719।
  • जल की कमी वाले ब्लॉक → 26 से 19।
  • कोरिया → 5% मॉडल।
  • शीर्ष जिले → सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदा बाजार-भाटापारा, कबीरधाम।
  • SAM → शैलो एक्विफर मैनेजमेंट।
  • SAM → 75 AMRUT शहर।

निष्कर्ष

जल संचय जन भागीदारी के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान प्राप्त करना जल संरक्षण में सरकारी हस्तक्षेप और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने के महत्व को दर्शाता है। राज्य का कोरिया 5% मॉडल यह भी दर्शाता है कि किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को किस प्रकार समर्थन दे सकती है।



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